म्यांमार की आबादी का अल्पसंख्यक समुदाय 'रेहिंग्या मुस्लिम' अराकान (राखिन) प्रान्त में बसने वाले मुस्लिम लोग हैं। म्यांमार में तक़रीबन 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं,जबकि म्यांमार की बहुसंख्य आबादी बोद्धों की है और इन दोनों समुदाय के बीच खींच-तान बना रहता है ऐसे में जिससे म्यांमार में 'रोहिंग्या मुसलमान' आबादी पर जुल्म होते रहते है।
तंग बेवश होकर रोहिंग्या समुदाय के लोग म्यांमार से सटे भारत, बांग्लादेश, थाईलैंड में शरणार्थी बनकर प्रवेश कर जाते हैं, जो अवैध प्रवासी हैं, जिन्हें सरकार नागरिकता देने से इनकार कर चुकी है। हालांकि ये म्यांमार में पीढियों से रह रहे हैं। रखाइन स्टेट में 2012 से सम्प्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगो की जाने गई है और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
म्यांमार में मोंग्डोव सीमा पर 25 अगस्त के हमले में 9 पुलिस अधिकारियों के मारे जाने के बाद पिछले महीने रखाइन स्टेट में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया था। सरकार के कुछ अधिकारियों का दावा है कि ये हमला रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने किया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने मौगडोव जिला की सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया और एक व्यापक ऑपरेशन शुरू किया।
रोहिंग्या कार्यकर्ताओं का कहना है की अभी तक 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ो
लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। म्यांमार के सैनिकों पर मानवाधिकार के उल्लंघन के संगीन आरोप लग रहे है जिसे सरकार सिरे से ख़ारिज कर रही है। इन सब के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र ने भी म्यांमार की मानव तस्करी पर संज्ञान लेते हुए म्यांमार सरकार को फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि रोहिंग्या लड़ाकों द्वारा 25 अगस्त को किये गए हमले के बाद म्यांमार की सेना की कार्रवाई से विस्थापित 1 लाख 23 हज़ार से ज्यादा लोगों ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ली है। बांग्लादेश ने रोहिंग्या शरणार्थियों के आने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
रखाइन में जारी हिंसा के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 से 7 सितम्बर तक म्यांमार की यात्रा पर हैं और उनका कहना है कि भारत अवैध रूप से रह रहे करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करेगा।
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